जाति धर्म से कभी भूख नहीं मिटती, उदर डोलता है मेरा सब्जी पर भात पर। जाति धर्म से कभी भूख नहीं मिटती, उदर डोलता है मेरा सब्जी पर भात पर।
थकहार कर जब मैं, गम से बोझिल हुआ मौत को पुकारा, पर उसने भी ना छुआ, थकहार कर जब मैं, गम से बोझिल हुआ मौत को पुकारा, पर उसने भी ना छुआ,
उसी पेड़ के इक पत्ते से मुझ पर एक ओस की बूंद आ गिरी है उसी पेड़ के इक पत्ते से मुझ पर एक ओस की बूंद आ गिरी है
पत्थर को खुदा और खुदा को पत्थर बना सकती है। पत्थर को खुदा और खुदा को पत्थर बना सकती है।